लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली…
लघुकथा: बेटी की शादी का एक फूल
शादी के दूसरे दिन घर सबसे ज्यादा खाली लगता है। टेंट की आखिरी बल्ली अभी-अभी ट्रक…
कहिनी: सुमता के डोर-डोरेलाल कैवर्त ” हरसिंगार “
करमडीह गाँव के सुमता सबो ले अलगेच चिन्हारी हावे।उहां के सुमता के सोर दुरिहा-दुरिहा ले सेमी…
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना…
लघुकथा : मेडल -डॉ. विनोद कुमार वर्मा
एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर यातायात पुलिस में…
गुल्लक (हिंदी लघुकथा) – डॉ. विनोद कुमार वर्मा
दस बरस की अंशु की छुट्टियाँ चल रही थी। आज शुक्रवार का दिन था। महीने…
पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई- डुमन लाल ध्रुव
भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोककलाओं, लोकगीतों और लोकपरंपराओं में निहित है। देश के प्रत्येक…
सरस्वती सुता (लघुकथा) - डॉ. विनोद कुमार वर्मा
’अपनी पोती को कैसी शिक्षा दे रहे हैं वर्मा जी? हम जैसे विद्वानों को बुद्धू…
कहानी: लंगड़ा कौन? (आपबीती)- डॉ. विनोद कुमार वर्मा
( 1 ) एक लंगड़ा भिखारी बैसाखी पकड़े हाथ फैलाए खड़ा था। ‘दू रुपिया बाबूजी …..…
आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति का संकट
प्रस्तावना भारत की संस्कृति, संस्कार और परम्पराएँ हजारों वर्षों की तपस्या, अनुभव और सामाजिक प्रयोगों का…