Sliding Message
Surta – 2018 से हिंदी और छत्तीसगढ़ी काव्य की अटूट धारा।

बाल कविता संग्रह:पक्षी खुश हैं गाते गीत-डॉ अलका सिंह

बाल कविता संग्रह:पक्षी खुश हैं गाते गीत-डॉ अलका सिंह

1.
जागो बच्चो हुआ सवेरा

जागो बच्चो हुआ सवेरा ,
हुआ सवेरा जागो बच्चो।
जागो बच्चो हुआ सवेरा
फूलों को भौरों ने घेरा।
हवा चली बादल परचढ़कर
खुशियों का है सुन्दर घेरा।
जागो बच्चो हुआ सवेरा ,
हुआ सवेरा जागो बच्चो।
जागो बच्चो हुआ सवेरा।

2.
संतरा

बोलो संतरा है खाया ?
गोले का आकार बताया
नारंगी रंग है इसने पाया
विटामिन सी का स्रोत बताया।

3.
सुबह सवेरे

सुबह सवेरे जो आप उठेंगे
देखें गेचिड़िया तोते चहके
गिल्ली दौड़ी भागी वो ,
पीछे सुन कुत्ते की भौं भौं।
बिल्ली दौड़ा ये चूहे को
दूध पी गया बोलो कौन ?
हरे भरे हैं सा रेपेड़ ,
फूलों संग सूरज का खेल
सुस्त पड़े तुम अब भी लेटे।

सुबह सुबह का समय निराला
प्रकृति के कितने रूप ले आया।
उठ जाओ अब प्यारे बच्चे
बगीचे में देखो फल पक्के कच्चे।

4.
मेरी वैक्सीन

कोरोना से रहे परेशान ,
बच्चे बूढ़े और जवान।
यह कैसा है दैत्य अब आया।
जिसने सबको लपट है खाया।
फिर आयी इसकी बड़ी दवाई
इसकी उसने किया पिटाई।
कोविशील्ड और कोवैक्सीन ,
नाम है अब सबने जाना
है इसको अब दूर भगाना।
खुश हैं सारे लोग हर तरफ ,
अब कोविड सेना हीं हैडर।
वैक्सीन लग जाए गीजब
जायेगा तुरंत कोरोना डर।
प्यारे बच्चो खेलो कूदो , हँसकर बोलो
वैक्सीन सुरक्षित करती है मिल कर बोलो।

5.
खीरा

मम्मी गर्मी मुझ को लगती
हुयी पसीने से मैं बेहाल।
एसी ,कूलर नहीं चलाना ,
ये सब अब लगते बेकार।
कुछ ऐसा तुम यत्न बताओ
औ रकोई फल मुझेसु झाओ

या कुछ बिना पका ही लाओ।
ठंडा ठंडा मन हो जाये
शरीर ऊर्जा से भार जाये।
मम्मी बोली खीरा देखो
बना रसोई की शान यह बैठा ,
कहता मुझ को ही तुम खाओ,
फिर अपना अहसांस बताओ।
मजबूत हड्डियों को मैं करता ,
मैं पानी की कमी का पूरक
और त्वचा को देता रंगत।
आँखों को शीतलता देता
दिल की जलन को दूर भगाता।

खाना खाना चिल्लाओ ,
खाओ पीयो स्वस्थ हो जाओ
खीरा कहता मुझको खाओ।
फोलिक एसिड से मैं भरपूर
देखो चिंताओं से दूर।
विटामिन सी समेत सिलिकॉन
बनता मेरा सूप सलाद।
खीरा कहता मुझ को खाओ।
खीरा कहता मुझ को खाओ

6.
खेत हमारे

खेत हमारे हरे भरे हैं समतल
और यहाँ पर वन भी हैं देखो
हरियाले कितने और सघन।
वृक्षों से जब हवा गुजरती
तरल एक हरियाली बहती ,
सरस हमारा जीवन उर्जित,
अपने भारत में हरपल।
अपने भारत में हरपल।

7.
वर्षा

वर्षा ऋतु में झड़ी मनोरम ,
फैली है घर -बाहर, आँगन में
झूमझूम कर बौछारें
भिगो रहीं हैं सबको।

वर्षा की बूँदें पाकर
बीजों में अंकु रफूटे
हरियाली फैली धरती पर
खुशियां छायी हर मन में।

8.
तोता

तोता उड़ता -उड़ता आया
गीत सुनाता आया।
हरे हरे पत्तों से पर उसके
बैठ गया शाखा पर छिपकर।

कहता बच्चो ढूंढो मुझको
मैं किधर कहाँ बैठा हूँ।
फिर तुम छिपना ,मैं ढूंढूंगा,
खेल शुरू अब करता हूँ।

9.
पक्षी आया

आकर धीरे से पक्षी
बैठ गया खिड़की के बाहर
चहक चहक के कहता है
निकलो बच्चो घर से बाहर।

देर हुयी सूरज को निकले
धूप मखमली फैली है ,
चलो खेलते हैं मिलकर
दोस्त यहाँ आये हैं बाहर।

10.
पवन का शीतल झोका

खिड़की से अंदर आता
तरल पवन का शीतल झोका ,
आता नन्हे वादे करता ,
खिड़की से अंदर आता
तरल पवन का शीतल झोका।

कहता है बच्चो बोली से
सदा मृदुल बन जाओ ,
और हमारे जैसे तुम
अपनी राह बनाओ।
अपनी राह बनाओ।

11.
छोटी मछली

छोटी मछली उछल रही है
तालाब के बीचो- बीच में।
उस पर पड़ती किरणे कहती ,
छोटी दोस्त तुम कितनी प्यारी।

बच्चे ने देखा उसको
बोला , मछली आओ किनारे ,
हम मिलकर कुछ खेलेंगे
किरणों को भी लाओ।

12.
उड़ी तितलियाँ फूलों पर

उड़ी तितलियाँ फूलों पर
कलियाँ उन्हें देख मुस्कायीं
बोली तितली रानी बैठो
देर हुयी तुम बस मंडराई ।

दूर दूर तक उड़ आयी हो ,
बोलो , क्या ख़बरें लायी हो ?
सुना उधर हैं झीलें प्यारी,

मछली के नन्हे बच्चे हैं ,
बोलो आओ बैठो बोलो
कैसे मौसम उधर रंगीले?

13.
उड़ी पतंग एक नन्ही सी

बादल के संग बहुत दूर तक।
देखा पूरा शहर अकेले
पेड़ों के ऊपर उड़ उड़ कर।

उसने देखा कैसे लगते
स्कूल और घर ऊपर से ,
देखा उसने कैसे लगती
प्यारी प्यारी हरियाली।

देखा उसने पक्षी कितने ,
ऊपर उड़ते उड़ते ,
खुश थी वह कितनी
बादल के संग उड़ते।

14.
बिजली चमकी बादल में

बिजली चमकी बादल में
सिहरन उठी इधर मन में।
बादल भी फिर जोर से गरजे ,
पानी बरसा अमृत जैसा।
बिजली बादल के भीतर
पानी बरसा झूम झूम कर
वर्षा से फिर मन हर्षा
बिजली चमकी बादल में।

15.
मछली कूद रही है देखो

मछली कूद रही है देखो 
चालीस बार तो कूदी होगी ,
कहना है इसको कुछ बातें 
कुछ बातें तो सोची होगी ।
देखो मेढक के बच्चे भी ,
धीरे धीरे पास आ रहे 
अपनी तुतलाती बोली में 

ये भी प्यारा गीत गा रहे ।
मछली कूद रही है देखो ,
चालीस बार तो कूदी होगी ।

16.
आम पेड़ की झूली डाली

आम पेड़ की झूली डाली ,
कितने पक्षी गीत गा रहे ,
बिल्ली बजा रही है ताली,
आम पेड़ की झूली डाली ।
बच्चो आओ दोपहर है ,
धूप खिली है अच्छा मौसम 
पौधे कितने सुंदर हैं ,
आम पेड़ की झूली डाली ।

17.
बसंत उत्सव है आज

बसंत उत्सव है आज 
भर भर अंजलि में मकरंद 
कलियों पंखुड़ियों के रंग 
है बसंत का उत्सव आज ,
प्रकृति बजाती अपनी साज।
पीला वन है ,पीला उपवन 
पीले ,हरे का आज मिलन ,
गीत यहां ,संगीत यहां ,
है बसंत का उत्सव आज ।
है बसंत का उत्सव आज 
प्रकृति बजाती अपने साज ।

18.
धूप कभी फिर धूप हटी

धूप कभी फिर धूप हटी
अभी थी वर्षा अभी छटी,
मौसम बदल रहा हर दिन 
सावन के आए हैं दिन।
हरी भरी हरियाली है ,
धरती पर खुशहाली है ,
वर्षा जल हर तरफ भरा ,
वृक्षों ,का पत्ता पत्ता हर्षा ।

19.
चहक रही गिलहरी

चहक रही गिलहरी
कर रही है काम।
व्यस्त रही इधर उधर
हो रही है है शाम।
ढूंढ ढूंढ ला रही
इधर उधर से वस्त्र ,
चहक रही गिलहरी
कर रही है काम।

20.
हरी भरी सुबह

हरी भरी सुबह हुयी
वर्षा की झड़ी लगी।
पत्ते धुले धुले

वृक्ष सभी खिले हुए ,
मोती सी बूँद है
पत्तों पर गिरी हुयी।
हरी भरी सुबह हुयी
वर्षा की झड़ी लगी।

21.
बीता सावन

बीता सावन , भादों आया
तीव्र वेग से वर्षा लाया।
सावन में थी रिमझिम वर्षा
हरियाली से सब कुछ हर्ष।
अब वर्षा की झड़ी निराली
खुशियों वाली हरियाली।

22.
पक्षी खुश हैं गाते गीत

हरे भरे हैं वृक्ष और तृण
हरा भरा है पूरा दृश्य।
बच्चो आओ बाहर खेलो
 सुनो प्रकृति का तुम संगीत।
पक्षी खुश हैं गाते गीत
हरे भरे हैं वृक्ष और तृण।

डॉ अलका सिंह के विषय में

डॉ अलका सिंह डॉ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी लखनऊ में शिक्षक हैं।शिक्षण एवं शोध के अतिरिक्त
डॉ सिंह महिला सशक्तीकरण , विधि एवं साहित्य तथा सांस्कृतिक मुद्दों पर काव्य , निबंध एवं समीक्षा क्षेत्रों में
सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त वे रजोधर्म सम्बन्धी संवेदनशील मुद्दों पर पिछले लगभग डेढ़ दशक से शोध ,प्रसार एवं
जागरूकता का कार्य कर रही है। वे अंग्रेजी और हिंदी में समान रूप से लेखन कार्य करती है और उनकी रचनायें देश
विदेश के पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती हैं। “पोस्टमॉडर्निज़्म”, “पोस्टमॉडर्निज़्म : टेक्स्ट्स एंड
कॉन्टेक्ट्स”, “जेंडर रोल्स इन पोस्टमॉडर्न वर्ल्ड”, “वीमेन एम्पावरमेंट”, “वीमेन : इश्यूज ऑफ़ एक्सक्लूशन एंड
इन्क्लूज़न”,”वीमेन , सोसाइटी एंड कल्चर” , “इश्यूज इन कैनेडियन लिटरेचर” तथा “कलर्स ऑव ब्लड” , “भाव
संचार” जैसी उनकी नौ पुस्तकें प्रकाशित हैं तथा शिक्षण एवं लेखन हेतु उन्नीस पुरस्कार/ सम्मान प्राप्त हैं।
अभी हाल में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च शिक्षा श्रेणी में राज्यस्तरीय मिशन शक्ति सम्मान 2021 प्रदान
किया गया है। उन्हें राष्ट्रीय नयी शिक्षा नीति 2020 में विशिष्ट योगदान हेतु राज्य सरकार द्वारा सम्मान पत्र भी
प्राप्त है। उनकी पुस्तक कोर्स ऑफ़ ब्लड को यूनाइटेड नेशंस मिलेनियम कैंपस नेटवर्क एवं ग्लोबल अकादमिक
इम्पैक्ट के मंच पर 153 से भी ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष चर्चित विषय के रूप में शामिल किया गया है।
पता : असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी, डॉ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आशियाना , कानपुर रोड, एल .डी.ए. स्कीम , लखनऊ-226012

Divine Elegance: Hand-Embroidered Lord Ganesha Frame – 300×300 Square
Divine Elegance: Hand-Embroidered Lord Ganesha Frame
AmurtCraft
Divine Elegance: Hand-Embroidered Lord Ganesha Frame
₹1099.00

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अगर आपको ”सुरता:साहित्य की धरोहर” का काम पसंद आ रहा है तो हमें सपोर्ट करें,
आपका सहयोग हमारी रचनात्मकता को नया आयाम देगा।

☕ Support via BMC 📲 UPI से सपोर्ट

AMURT CRAFT

AmurtCraft, we celebrate the beauty of diverse art forms. Explore our exquisite range of embroidery and cloth art, where traditional techniques meet contemporary designs. Discover the intricate details of our engraving art and the precision of our laser cutting art, each showcasing a blend of skill and imagination.