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Surta – 2018 से हिंदी और छत्तीसगढ़ी काव्य की अटूट धारा।

बाल कविता संकलन:गाती रही हवा-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन:गाती रही हवा-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन:गाती रही हवा

-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन:गाती रही हवा-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
बाल कविता संकलन:गाती रही हवा-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

इस बाल कविता संकलन में कुल 50 बाल कविता संकलित है, जिसमें बाल मनोवृत्ति और प्रकृति का अनूठा मिश्रण प्रस्‍तुत किया गया है । बाल पाठक इन कविताओं से आनंदित होगी ऐसी आशा है ।

1.तितली उड़ी और आ बैठी

तितली उड़ी और आ बैठी
कॉपी के पन्नो पर
बोली मुझको भी पढ़ना है
नई नई बातें करना है ।
आर्या बोली रुको अभी
थोड़ा होमवर्क है बाकी ,
इसको देखो निबटा लूं ,
फिर करते है बातें काफी ।

2.नील गाय

भागती है नील गाय
गर्मियों के दिन
कटी फसल
सूख रहे ताल सरोवर ।

उन्हे जल की तलाश
उन्हे छांव की तलाश
दूर नदी तट दिखा ,
भागती हैं नीलगाय ।

3.छोटी सी झील

छोटी सी झील
सारसों का गांव
झील में खड़े हुए
आधे भिगो पांव ।

झील है हरी भरी
हरे हैं शैवाल
मछलियों के वहां
मछलियों के खेल वहां
खुशी हर प्रकार

4.शाम को बगुले

हुई शाम बगुले निकले
वापस अपने नीड़ बसेरे
सुबह सुबह से डाले थे
आकर तालाब किनारे डेरे ।

उड़ते उड़ते बोल रहे हैं
अपनी बातें सुना रहें हैं
कोई कहता हुई दोस्ती
चंचल सी मछली से ,
और दूसरा कहता मैं तो
मिला सुनहरे मेढक से ।

5.गर्मी की शाम

गर्मी की शाम
हरा भरा गांव ,
लौट रहे पशु
स्वयं अपने थान ।

गर्मी की शाम ,
हरा भरा गांव।
प्रसन्न हैं लोग सभी ,
शाम की अलग खुशी ।
गर्मी की शाम
हरा भरा गांव।

6.तितली और बच्चा

तितली आई ,बोली ,
बच्चे ,कोई कहो कहानी
क्या सीखा है तुमने बोलो
कैसे बारिश कैसा पानी ।

बच्चा बोला ,जल का भी है
तितली, एक चक्र सुंदर
है समुद्र से होकर वास्पित
ये बनता बादल और बरसता ।

तितली खुश थी ,बोली ,
बच्चे तुमने कितनी अच्छी बातें सीखी
तुमने पर्यावरण पढ़ा है
जानी बातें कई अनोखी ।

7.एक कहानी जंगल की

एक कहानी जंगल की ,
एक हवा पानी की ।
एक कहानी धरती की ,
एक कहानी मिट्टी की ।
सभी कहानी मिल जायेंगी ,
पर्यावरण बनेगा ।
उससे ही जीवन की बातें ,
उससे जीवन रक्षण होगा ।

8.रोकें हम वायु प्रदूषण

काला धुँआ उगलती चिमनी ,
जीवन काला करती चिमनी ।
वायु प्रदूषण फैलाता
काला धुँआ जहर फैलाता ।

रोकें हम वायु प्रदूषण
रखें स्वच्छता इधर -उधर ।
स्वच्छ वायु तो अच्छी सांसे ,
स्वच्छ रहेगा अपना जीवन ।

9.मेढक काफी ऊपर उछला

मेढक काफी ऊपर उछला ,
बच्चे को आवाज लगाया ,
बोली दोस्त जरा सुनना ।
आज सुबह इस तरफ कहां से
बच्चा एक बड़ा नटखट आया ।
उसने कितने पत्थर फेंके
इधर हमारे ऊपर ,
सोचो अगर चोट लग जाती
यहाँ कई मेढक थे भीतर ।

बच्चा बोला बात गलत है
मैं जाकर देखूंगा ,
जो भी होगा ,उसे बुलाकर
पास आपके लाऊंगा ।

10.चाँद , छोटी मछली और उसकी माँ

चांद देखकर छोटी मछली
अपनी माँ से बोली ,
मुझको भी है ऊपर जाना
आज चांद से मिलना ।

मम्मा मछली बोली ,बेटी
इसमें क्या है ,अभी देखना
देखो लहरों से कहकर
उसको नीचे बुलवाती हूं,
देखो लहरों में है वो
चलो खेलते हैं उससे ।

11.छोटी मछली ,पत्तियां और कबूतर

छोटी मछली ने सोचा,
कैसे जाये वहाँ पत्तियों पर
कितनी हरी भरी चमकीली
लटक रहीं है पेड़ों पर ।

उछली कई बार ऊपर
लेकिन वापस गिरी वहीं
पानी में वापस आई ,
देख रहा था दोस्त कबूतर
उसने पत्ती एक गिराई ।
मछली ने धन्यवाद दिया
और कबूतर मुसकाया ।

12.बुलबुल मिली आज मैना से

बुलबुल मिली आज मैना से
बोली मैना गीत सुनाओ ।
तुम कितना प्यारा गाती हो ,
अपनी कला आज दिखलाओ ।
मैने अभी सुबह ही देखा ,
गीत गा रही थी तुम,
और न जाने कितने भंवरे ,
साथ कर रहे थे गुनगुन।

13.रात पपीहा बोला खूब

रात पपीहा बोला खूब ,
हवा रुकी थी ,गर्मी थी ,
चांद चमकता था नभ में ,
नीचे चमकीली थी दूब।

गीतों में थी एक कहानी ,
किसी राज्य के राजा -रानी
गीतों में थी कितनी नदियां
कितने प्यारे प्यारे जंगल ।
जंगल के जीवों की बातें ,
उनके कितने खेल निराले ,
रात पपीहा बोला खूब ,
एक कहानी बातें खूब।

14.जंगल जंगल उड़कर चिड़िया

कितने जंगल जंगल उड़कर ,
पहुंची चिड़िया आज शहर में।
उसने देखा कई इमारत ,
बच्चों को जाते स्कूल।

चिड़िया ने रोका बच्चे को ,
बोली हमको भी ले लो साथ ।
हमे देखना है विद्यालय ,
पढ़ना है बच्चों के साथ।

15.मेढ़क का दोस्त बना कछुआ

मेढ़क का दोस्त बना कछुआ ,
कछुआ अक्सर सोता रहता ।
मेढ़क उसको पहुंच जगाता ,
कहता जागो खेलो आकर।
बिता रहे क्यों समय तुम सोकर ।
कछुआ को अच्छी लगी ये बात
इसको भाया मेढ़क का साथ।
मेढ़क का दोस्त बना कछुआ ।

16.चींटी और टिड्डा

चींटी ने संगीत बनाया ,
फिर टिड्डे ने गाना गाया ।
दोनो ने कहा बनायें बैंड ,
शामिल हों उसमे नए दोस्त।
कितने सारे नन्हे कीड़े ,
आए अपना देने योग
बैंड बना काफी अच्छा सा ,
सबको भाया नया प्रयोग।

17.चिड़िया जल में तैर रही थी

चिड़िया जल में तैर रही थी ,
देखा उसको कौवे ने
बोला चिड़िया मैं भी तैरूं
बोली कैसे सीखा तैरना ।

चिड़िया बोली ,मैं जलमुर्गी
हो जल हो या बाहर जंगल
मैं दोनों में रह लेती हूं।
लेकिन मुझको याद नहीं है
कैसे आया मुझे तैरना ।
मैने बचपन से ही
अपनी मां के संग संग तैरी
शायद वैसे जैसे तुमने , हे
कौवा जी ,सीखा है उड़ना।

18.झबरीली पंखों की चिड़िया

झबरीली पंखों की चिड़िया
आई उतर गई जल में।
उसे लगा यह चमचम बालू
लेकिन ये तो जल ही जल था।
थोड़ी देर रही हिल -डुल कर
थोड़ा तैरी इधर उधर।

कछुआ देख रहा था ये सब
संकट में देखा उसने चिड़िया को
आया बोला , चिंता की है बात नही
बहिन हमारी पीठ पर बैठो
पंखे थोड़ी देर सुखाओ,
फिर जब चाहो
तुम उड़ जाओ ।

19.बकरी के बच्चे

बकरी के बच्चे आये
बंदर की थी सजी दुकान ।

भालू बनकर हलवाई
बना रहा था पकवान ।

आश्चर्यचकित हो बैठे बच्चे
आई शंका मन में उनके ।

बंदर तो परिचित था उनका
लेकिन भालू से डर था ।

यही सोचकर तीनों ने
सोचा पकड़ें चलो रास्ता घर का ।

20.सुबह सुबह की किरणें

सुबह सुबह की किरणें आतीं
रोज जगाती हैं उपवन को।
जगते फूल सभी जल्दी ,
कलियां जगती अंगड़ाई ले।

धीरे धीरे बच्चे आते ,
पक्षी चहचह कर उन्हे जगाते ,
मिलते बच्चे, होते खेल,
पक्षी जीव जंतुओं के खेल।

21.सड़क के पार

उधर सड़क के पार खड़ा है
भूरे पत्थर का एक पहाड़ ।
वैसे तो पत्थर ही हैं ,पर
हरियाली उसका सिंगार।

छोटे छोटे पशु रहते हैं ,
पक्षी रहते वहां हजार ।
कितनों को जीवन देता
झरना वहां एक छोटा सा ,

सबकी सबसे वहां मित्रता
है झरना जीवन आधार ।

22.तितली हरी हरी

हरी निबौली में छिप बैठी
तितली हरी- हरी प्यारी
सोच रही है यह क्या है,
चिकनी लड़ियों कड़ियों वाली ।

पहली बार इधर आई थी
गांव बीच नीमों के ऊपर ।
वृक्ष लदे से खड़े सभी हैं,
खुश होकर सब तनकर ।

23.बरसा पानी ,झूम झूम कर

बरसा पानी ,झूम झूम कर
हर तरफ खुशी हरियाली आई।
खुश हो किसान निकले घर से
चेहरे पर मुस्कान सजाये ।

भर गए खेत पानी से
पशु पक्षी खुश होकर नाचे

अपनी सभी कहानी ले
वर्षा आई झूम झूम कर
खुशियों भरी कहानी ले।

24.सूरज

ढलता सूरज उगता सूरज ,
दोनो एक सी आभा लेकर
जाते हैं ,आते हैं।
ऐसी ही सोच लिये हम सब
जीवन जीते जाते है ।
धैर्य हमारा सच्चा साथी
मिलता रहता साथ हमारे
जीवन के हर कदम कदम पर ,
और इसी के साथ हमेशा
रहते बढ़ते हैं हम पथ पर।

25.खेत में चिड़िया

खेत में चिड़िया
चुग रही दाने
बोला एक कीड़ा
गिनो ये सब दाने ।
एक बाली गेंहू
इसमें कितने दाने
बोलो बोलो चिड़िया
इसमें कितने दाने ?

26.आया बहुरुपिया स्वांग दिखाने

आया बहुरुपिया स्वांग दिखाने ,
कभी घूमता बन हिंसक पशु
धरता तरह तरह के रूप।
कभी चीखता चिल्लाता वह
कभी बिना बोले कुछ कहता।
आया बहुरुपिया स्वांग दिखाने।
रंग रंग के कपड़े उसके
उसी रंग में उसका मेक अप।
कभी अचानक छिप कर चलता ,
और कभी वह धूम मचाता ,
आया बहुरुपिया स्वांग दिखाने।

27.फूल गा रहें गीत

नन्हे नन्हे फूल
गा रहें हैं गीत।
गीत में बुलबुले
भर रहे संगीत।
नन्ही नन्ही चिड़िया
गाती है गीत।
गीत में बादल ,
भरे भरे नीर।
गीत में किरणें
अन्धकार चीर।

28.घास गा रही गाने

घास गा रही गाने ,
नन्हे नन्हे शब्द ,
शब्दों में चित्र।
घास गा रही गाने।
कुछ तो यूँ ही पंक्ति ,
कुछ के कितने माने।
घास गा रही गाने।
नन्हे नही शब्द
कुछ के तो माने
कुछ यूँ ही गाने।

29.नीली चिड़िया गाती रहती

नीली चिड़िया गाती रहती ,
जब जब घिरती बदली।
कहती बदली नीर भरी तुम ,
पानी तुम बरसाओ।
नीली चिड़िया गाती रहती
उसके बोल सुहाने ।
उसके गीतों में हैं खुशियां
उसके बोल सुहाने।

30.छोटी बच्ची मिली बाज से

छोटी बच्ची मिली बाज से
बोली जा के कुछ फल लाओ
दूर पेड़ पर आम लगा है
उसे तोड़ कर लाओ।
बोला बाज , ” सुनो बच्चे
मैं आम नहीं खाता हूँ ,
फिर भी तुम कहते हो ,
जाकर चलो तोड़ लाता हूँ।

31.सियार करता रहा हूक

सियार करता रहा हूक
गरम था मौसम
फैली धूप ।
सोचा थोड़ी हवा चले
ठंडा हो मौसम बदले ,
तब तो मैं बाहर निकलूं
तब तक घर में ही सो लूँ।
सियार करता रहा हूक ,
गरम था मौसम ,
फैली धूप ।

32.छायी बदली , आयी बदली

छायी बदली , आयी बदली
बच्चे निकले घर से हो खुश ।
मौसम ठंडा ,आयी बदली।
वर्षा होने वाली है अब ,
आयी बदली, छायी बदली।
बच्चे निकले घर से हो खुश ।
मौसम ठंडा ,आयी बदली।

33.ठंडी हवा साथ ले आयी

ठंडी हवा साथ ले आयी ,
जाने कितने कितने पक्षी।
कलाबाजियां करते हैं
आसमान में कई कबूतर।
मौसम है हो गया सुहाना
चिड़ियों ने है गाया गाना।
हरियाली थोड़ा मुस्काई ,
हर तरफ ख़ुशी सी छायी।

34.आँधी आयी धूल उड़ी

आँधी आयी धूल उड़ी,
फिर बौछारें तेज पड़ीं।
बिजली चमकी कितनी तेज ,
फिसली छोटी एक गिलहरी ,
आ पौधे के पास गिरी।
बच्चे की उसपर नजर पड़ी ,
उसे उठाया , लाया पानी
पी पानी खुश हुयी गिलहरी
तुरंत ही उसकी दोस्त बनी।

35.मेढक उछला

मेढक उछला ,चाह रहा था
चढ़ जाये वह जामुन पर।
पेड़ लगा था नदी किनारे
जामुन लगे हुए थे उसपर।
लेकिन बेचारा पहुँच न पाया
वापस गिरकर जल में आया।
चिड़िया बोली मेढक भाई
रहो रुको तुम अभी वहीँ पर।
मैं अच्छे जामुन लेकर आयी।

36.फूल से खेल रहे हैं चार पाँच नन्हे से कीड़े

एक फूल से खेल रहे हैं
चार पाँच नन्हे से कीड़े।
एक पंखुड़ी में छिप जाता
उसको देख फूल मुस्काता।
कीड़ा कहता मेरे भाई ,
मुझे छिपा लो अपने अंदर ,
मैं पडूँ किसी को नहीं दिखाई।
फूल छिपाता उसको अंदर ,
फिर वह जोर जोर से हँसता।

37.चिड़िया नीली नीली

नन्हे नन्हे फूल
ठंडी हवा।
चिड़िया नीली नीली ,
गाती है गीत।
फूल मुस्कराते ,
हवा उनकी मीत।
नन्हे नन्हे फूल ,
गाते हैं गीत ।

38.छोटा बच्चा , नीली मछली

छोटा बच्चा , नीली मछली
दोनों में है बड़ी दोस्ती।
बच्चा लेकर आया चारा
मछली ने जैसे देखा
जल में वह खुशियों से उछली ,
बोली ,आया दोस्त हमारा।
बच्चे ने डाला दाने ,
मछली ने खाया चारा ।
दोनों ने गाया गाना।

39.घास गाती गीत

घास गाती गीत ,
नन्हे नन्हे गीत ।
गीतों में प्रेम ,
गीतों में भाव।
घास गाती गीत ,
घास गाती गीत।

हँसते हैं कीड़े
खुश सभी तितलियाँ।

गीतों में दिख रहीं
सुबह सुबह की किरण
किरण से है प्रेम।
बादलों की चाह ,
बादलों का इंतजार
घास गाती गीत।

40.रात अचानक वर्षा आयी

रात अचानक वर्षा आयी
पत्ते डोले , पौधे खुश ।
खुश होकर सब डाली झूमीं ,
पेड़ों ने खुशियां फैलाई।
हवा चली मनभावन कितनी
और अचानक बिजली चमकी ।
तेज तेज बौछारें आयीं
गर्मी घटी अचानक कैसे ।
प्यारा सुखद सवेरा आया।
रात अचानक वर्षा आयी।

41.तोते उड़ते आ धमके

तोते उड़ते आ धमके
सुबह सुबह ही वृक्षों पर ।
ठंडा ठंडा मौसम था ,
गर्मी में वर्षा आयी थी।
तोते ने देखा पत्ते ,
बारिश में कितने हरे भरे ।
हरे पंख हैं , हरी पत्तियां
हरा भरा मौसम प्यारा सा।

42.कौवे ने उड़ उड़ कर

कौवे ने उड़ उड़ बच्चो को
बारिश की कितनी बात बताई।
बोला बच्चो तुम सोये थे ,
झूम झूम कर बादल आये।
बादल ने कुछ गीत सुनाये
और हवा ने पंखे खोले
फिर नन्ही बूँदें बरसाई।
सोये पत्ते जाग गये सब
वर्षा से सबने खुशियां पायीं।

43.घास गा रही गाने

घास गा रही गाने,
धीमे धीमे स्वर कितने ,
हैं मिठास से भरे हुये ,
घास गा रही गाने।
कितने कीड़े और फतिंगे
कितने पक्षी छोटे छोटे
साथ दे रहे उसका।
घास गा रही गाने,

घास गा रही गाने।

44.नन्हे फूल और घास

नन्हे फूलों ने कहा घास से ,
घास बहन, हम चलो खेलते
कोई नया -नया सा खेल।
इसमें बाकू कीड़ा होगा
उसके आयेंगे सब दोस्त।
कभी छिपेगा बाकू तुममे
उसको मुझे ढूंढना होगा
फिर जब हम छिप जायेंगे
बाकू को वह करना होगा।

45.खिलौने वाला

आया एक खिलौने वाला
तरह तरह के नये खिलौने
वह करता उनसे बातें ।
सिखा रहा है अच्छी बातें
वह भी गाते गाते।
किसी खिलौने से कहता है
जाओ बच्चों के दोस्त बनो ,
और दूसरे को कहता है
हिल मिलकर सबके साथ रहो।
आया आज खिलौने वाला ,
करता अच्छी अच्छी बातें।

46.गोसुम गिद्ध

ऊपर काफी दूरी पर ,
धरती से काफी ऊपर ,
निकल गया उड़ते -उड़ते ,
आज सवेरे गोसुम गिद्ध ।
गोसुम ने देखा ऊपर से
नदियां , पोखर , झील निराली ,
और शहर के कई नज़ारे।
चींटी तक को देख लिया
उसकी आँखें इतनी तेज।
उसने सोचा क्यों न यारों
उड़ूँ इस तरह मैं अब रोज़।

47.चिड़िया चहकी गीत बन गये

चिड़िया चहकी गीत बन गये ,
हवा झूमती बहती वन में
इससे ही संगीत बन गया।
श्रोता बन कर जीव जंतु सब
खुश हो होकर हुए इकट्ठे ,
जंगल हरसा ,हर मन चहका ,
खुशयों की हो जैसे वर्षा
एक आज त्योहार बन गया

48.नदी किनारे ठंडा बालू

नदी किनारे ठंडा बालू ,
शाम हुई मौसम ठंडा सा ।
बूंदाबांदी हुई अचानक ,
नाचे मोर पंख फैलाकर ।

जब देखा मछवारों ने ,
वो भी आये लगे नाचने
मौसम ठंडा पुरवाई का ,
गर्मी में ठंडा ठंडा सा ।

49.मैना और गिलहरी

मैना चली गिलहरी के संग ,
पैदल पैदल हरी घास पर ,
मैना बोली धूप बहुत है ,
देखो यह कैसा मौसम है ।

है तो मौसम गर्मी का ,
धूप तेज तो होगी ही,
मुस्काई थोड़ा रुकी गिलहरी ।
लेकिन बढ़ते प्रदूषण ने
गर्मी बहुत बढ़ाई है ।

50.रूठी रूठी लगी पहाड़ी

रूठी रूठी लगी पहाड़ी
पत्थर सरके , चिड़िया रोई,
धुंध उठे से बादल छाये ,
हवा बही कुछ गरम गरम सी ,
प्रदूषण की बदली छायी।
पशु पक्षी जंगल से आये ,
लोगों के संग बैठक की ।
बैठक में मुद्दे ये आये ,
मिलकर दूर करें प्रदूषण ,
रखें स्वस्थ घर आँगन जंगल।

प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह
(डॉ रवीन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं। वे अंग्रेजी और हिंदी लेखन में समान रूप से सक्रिय हैं । फ़्ली मार्केट एंड अदर प्लेज़ (2014), इकोलॉग(2014) , व्हेन ब्रांचो फ्लाईज़ (2014), शेक्सपियर की सात रातें (2015) , अंतर्द्वंद (2016), तीन पहर (2018 )चौदह फरवरी (2019),चैन कहाँ अब नैन हमारे (2018) उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। बंजारन द म्यूज(2008) , क्लाउड मून एंड अ लिटल गर्ल (2017),पथिक और प्रवाह (2016) , नीली आँखों वाली लड़की (2017), एडवेंचर्स ऑव फनी एंड बना (2018),माटी (2018 )द वर्ल्ड ऑव मावी(2020), टू वायलेट फ्लावर्स(2020) प्रोजेक्ट पेनल्टीमेट (2021),कोरोना और आम आदमी की कविता (2021), एक अनंत फैला आकाश (2022) उनके काव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने विभिन्न मीडिया माध्यमों के लिये सैकड़ों नाटक , कवितायेँ , समीक्षा एवं लेख लिखे हैं। लगभग दो दर्जन संकलनों में भी उनकी कवितायेँ प्रकाशित हुयी हैं। उनके लेखन एवं शिक्षण हेतु उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट , शिक्षक श्री सम्मान ,मोहन राकेश पुरस्कार, भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार, डॉ राम कुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान 2020 ,एस एम सिन्हा स्मृति अवार्ड जैसे सत्रह पुरस्कार प्राप्त हैं ।
संपर्क : अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषा विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ 226007)
ईमेल : [email protected]
फ़ोन : 9415159137

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