Sliding Message
Surta – 2018 से हिंदी और छत्तीसगढ़ी काव्य की अटूट धारा।

दोहा जनउला-अजय “अमृतांशु”

दोहा जनउला-अजय “अमृतांशु”

दोहा जनउला

-अजय “अमृतांशु”

दोहा जनउला-अजय "अमृतांशु"
दोहा जनउला-अजय “अमृतांशु”

माटी के चोला हवय, आँच परे पक जाय।
गरमी के मौसम रहय, सबके प्यास बुझाय।।

लाली हरियर रंग मा, सबके मन ला भाय।
खावय जुच्छा जेन हा,तेन अबड़ सुसुवाय।।

खाथे कतको पीस के, सब झन येला भाय।
बिन डारे येकर बिना, सब्जी कहाँ मिठाय।।

चार खड़े हे सूरमा, हाथ सबो के जाम।
रस्सी बाँधे बाँह मा, गजब देत आराम।।

बिना प्राण के साँस ले,आगी ला दहकाय।
लोहा टिन ला छोड़ दव, सोना तक गल जाय।।

  1. मरकी 2. मिरची 3. पताल 4. खटिया
  2. धुकनी

अजय “अमृतांशु”
भाटापारा(छत्तीसगढ़)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अगर आपको ”सुरता:साहित्य की धरोहर” का काम पसंद आ रहा है तो हमें सपोर्ट करें,
आपका सहयोग हमारी रचनात्मकता को नया आयाम देगा।

☕ Support via BMC 📲 UPI से सपोर्ट

AMURT CRAFT

AmurtCraft, we celebrate the beauty of diverse art forms. Explore our exquisite range of embroidery and cloth art, where traditional techniques meet contemporary designs. Discover the intricate details of our engraving art and the precision of our laser cutting art, each showcasing a blend of skill and imagination.