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आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित मेरी आठ कविताएं

आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित मेरी आठ कविताएं

आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित मेरी आठ कविताएं

-अनुकृति राज

आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित मेरी आठ कविताएं
आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित मेरी आठ कविताएं

मेरी आठ कविताएं

1.दांडी मार्च


भारतीय स्वतंत्रता का यह संग्राम
आधार लिये यह सत्य अहिंसा का,
प्रतिरोध का सूचक बन
कहलाया यह नमक सत्याग्रह,
किंतु ‘सत्याग्रह’ की शक्ति लिए अंग्रेजों के
नमक-कानून के विरुद्ध, साबरमती से गांधी जी ने
दांडी तक का मार्च किया,
‘सत्य’ के समक्ष ना चल सके
अंग्रेजों के कोई दमन,
गांधी जी ने यह भी माना
हर भारतीय का अधिकार नमक है,
फिर हिल गई अंग्रेजी शासन भी
आजादी के हुंकारो से।

2.आजादी की आगाज

अंग्रेजों के कानून तोड़ने
निकल पड़े हम साबरमती से,
किंतु सत्य के साथ हम
निकल पड़े नमक बनाने,
चौबीस दिन की यह यात्रा में
जाति और मजहब के परे काफिले जुड़ते गए,
कीचड़ में नमक बिखेर कर
अंग्रेजों ने भूल किया,
बापू के बलिदानों ने
सख्त एक संदेश दिया,
और नमक-कानून को तोड़कर
झकझोर दिए हम अंग्रेजों को,
फिर बापू की गिरफ्तारी ने
बिखेर दिया आजादी की लहर।

3.गौतम बुद्ध

धर्म विजय के लिए जो जन्में
राजकुमार सिद्धार्थ गौतम,
किंतु मुक्ति का मार्ग खोज कर
सन्यासी बन बैठे गौतम,
और राज्य चक्र को त्याग कर
धर्मचक्र धारण कर निकले,
सात वर्ष की कठोर तपस्या कर
अपनाया एक मध्य मार्ग को,
त्याग दिया उस राजमहल को
और उस घोर तपस्या को,
आत्मसात कर दुनिया को
एकभूत हुए ब्रह्मांड शक्ति से,
बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर
जागृत हो कहलाए भगवान बुद्ध।

4.भगवान बुद्ध

सारनाथ में शिक्षा दिये जो
आठ अंगों का यह मध्य मार्ग,
दृष्टि, संकल्प, वचन, स्मृति
प्रयत्न, जीविका, और समाधि संग,
बतलाया सुख दुख में अंतर
मार्ग दिया निवारण का,
सरल बनाकर धर्म का मार्ग
खोल दिया संघ का दरवाजा,
असंप्रदायिकता का पाठ सिखा कर
स्थापित किया विश्व बंधुत्व को,
बुद्धत्व को अपनाकर मनुष्य
मानवता की पराकाष्ठा बन,
‘सर्वम दुखम’ को समझ कर
‘आत्म दीपो भवः’ का बोध हुआ।

5.भारत का संविधान

वाशिंदो ने मुल्क बनाकर
इस बहुमुख देश का संविधान रचा,
नंदलाल बोस की कलाकारी
और प्रेम बिहारी के कलम से,
सज गया यह लोक-ग्रंथ
भारत के इतिहास और पुराणों से,
भारत की अक्षुणता, अखंडता और स्वायत्तता
को समाए समानता और एकता,
फिर तीन साल में लिख गया
एक तसव्वुर एक मुल्क का
एक सामाज एक संस्कृति का।

6.चाणक्य

चाणक्य के नाम बिना
तक्षशिला ही अधूरा है,
मगध का वह अखंड साम्राज्य
और कॉटिल्य का मौर्य समाज,
समझ कर ‘अर्थशास्त्र’ को
फिर समझना भारतीय को,
‘अर्थशास्त्र’ की रचना करके
राज्य शासन का कला बताएं,
चलेगा तभी ‘राज्य’ और ‘धर्म’
‘न्याय’ के आधार पर,
विरोध हो जब ‘न्याय’ और ‘शास्त्र’ में
वहां राज्य संविधान चलेगा,
चंद्रगुप्त से प्रभावित होकर
मगध का सम्राट बनाया,
फिर साम दाम और भेद दंड पर
खड़ा किया एक अखंड साम्राज्य मगध का।

7.बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

जातियों का अनमोलन करके
गुलामी को मिटाने की बात कही,
‘धर्मशास्त्र’ पर सवाल उठाकर
कानूनी किताबें लिख डाली,
शिक्षित रह संगठित होकर
संघर्ष करने की बात कही,
‘समतामूलक’ समाज के पैरोकार ‘धर्मनिरपेक्षता’
और ‘बराबरी’ की जिसने बात कही,
र्विद्रोह किया मनु के
सामाजिक व्यवस्था को जिसने,
पिछड़ों को सीमित ना रखकर
समानता के अधिकारों तक की बात कही,
चेतन और जागृत कर जिसने
बराबरी की बुनियाद रखी,
‘रोजगार’ और ‘आधुनिक राष्ट्र’ के बीच
देखा एक गहरा संबंध,
‘पूंजीवाद’ और ‘जातिवाद’ का खात्मा कर
लड़ते रहे जो सामाजिक और राजनीतिक समानता के लिए।

8.ज्योतिबा फुले

महाराष्ट्र में जन्मे ज्योतिराव गोविंदराव फुले
‘जातिवाद’ ‘पुरोहितवाद’, स्त्री-पुरुष की समानता,
‘अंधविश्वास’ और संस्कृति भ्रष्टाचार के विरुद्ध
आवाज जिसने उठाया,
किया नेतृत्व पिछड़े समाज
और आजाद किया शोषणकारी चंगुल से उनको,
सावित्रीबाई संग महिलाओं के मुक्ति का प्रयास किया
जिसने समाज का उत्थान किया।

-अनुकृति राज
शोधार्थी लखनऊ विश्‍वविद्यालय, लखनऊ

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