छंद शास्‍त्र- छंद के रंग (छत्‍तीसगढ़ी में) ebook

151.00

यह कृति मात्रिक छंद का एक सम्‍पूर्ण ग्रंथ हैं, जिसमें छंद इतिहास, महत्‍व, उपयोगिता, नियम, परिभाषा आदि को सविस्‍तार निरूपित किया गया है । इसमेेंं छंद प्रस्‍तार, छंद की जाति, प्रत्‍येक छंद के प्रचलित छंद नियम उदाहरण सहित समझाये गयें हैं । इसमें 160 से अधिक छंदों को शामिल किया गया है ।

यह ग्रंद एक नवोदित छंदकारो के लिए उपयोगी है वहीं स्‍कूल कालेज के विद्यार्थियों के लिये भी उपयोगी है विशेष कर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ।

Description

छंद शास्‍त्र- छंद के रंग (छत्‍तीसगढ़ी में) भाग-1 मात्रिक छंद

यह कृति मात्रिक छंद का एक सम्‍पूर्ण ग्रंथ हैं, जिसमें छंद इतिहास, महत्‍व, उपयोगिता, नियम, परिभाषा आदि को सविस्‍तार निरूपित किया गया है । इसमेेंं छंद प्रस्‍तार, छंद की जाति, प्रत्‍येक छंद के प्रचलित छंद नियम उदाहरण सहित समझाये गयें हैं । इसमें 160 से अधिक छंदों को शामिल किया गया है ।

यह ग्रंद एक नवोदित छंदकारो के लिए उपयोगी है वहीं स्‍कूल कालेज के विद्यार्थियों के लिये भी उपयोगी है विशेष कर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ।

chhand ke rang

 

/लेखक के कलम ले/

छंद हमर भारत देश के धरोहर आय । वैदिक काल ले के आज तक छंद के महत्व कभू कम नई होय हे । छंद ला कविता के कसौटी कहे जाथे । हमर छत्तीसगढ़ के जनमानस मा छंद हा रचे-बसे हे । ये अलग बात हे छंद व्याकरण के बारे मा जानकारी कतका हे फेर छंद ले सबो परिचित हे । छंद के दोहा-चौपाई हमर गा्रमीण संस्कृति के एक अभिन्न अंग हे ।
छत्तीसगढ़ के भुईया हा पूरा भारत देष ला छंद षास्त्र दे हवय । हमर बिलासपुर के आचार्य जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’ हा हिन्दी साहित्य ला ‘छंद प्रभाकर दे हवय । मोर छंद के प्रेरणा स्रोत जनकवि कोदूराम दलित हा कई प्रकार के छंद ले छत्तीसगढ़ी रचना करें हवँय । आचार्य जगन्नाथ ‘भानु’ ला अपन आधारस्तंभ, मानसिक गुरू बनाके ओखरे शिल्‍प जइसे जेन छंद हे ओखर परिभाषा होही छंद मा दे के कोशिश करे हँव । छंद कतका प्रकार के होथे येखर गणना करे के रीति घला येमा दे गे हे । छंद के प्रकार अनंत हे कहँव त कोनो बड़े बात नई हे । समुद्र ले एक पसर पानी आ जय ओतके गजब हे । हिन्दी साहित्य मा जतका प्रचलित छंद हे ओ सबो छंद ला समेटे के प्रयास करे गे हे । छंद के परिभाषा, शिल्‍प अउ मात्रा विन्यास के संगे-संग हर छंद के उदाहरण घला दे गे हे ।
आशा अउ विश्‍वास हे के ये किताब नवा छंदकार मन के छंद सीखे मा मदद करही । टंकण मा पूरा कोशिश करे गे हे के कोनो गलती झन होवय फेर गलती ले गलती होगे होही त माफ करत सूचना देहूँ, जेखर ले ओ गलती ला सुधारे जा सकय ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *