Sliding Message
Surta – 2018 से हिंदी और छत्तीसगढ़ी काव्य की अटूट धारा।

काव्‍य श्रृंखला : सांध्‍य दीप भाग-18-डॉ. अशोक आकाश

काव्‍य श्रृंखला : सांध्‍य दीप भाग-18-डॉ. अशोक आकाश

सांध्‍य दीप भाग-18

-डॉ. अशोक आकाश

गतांक से आगे

काव्‍य श्रृंखला : सांध्‍य दीप भाग-18-डॉ. अशोक आकाश
काव्‍य श्रृंखला : सांध्‍य दीप भाग-18-डॉ. अशोक आकाश

/78/

गहन अमावस निशा अंधेरी,
चुप चुप लुक छिप आयी थी |
लप लप करती लौ से डरती,
घबरायी फरमायी थी ||

आप आये मेरे घर मैने,
अभिनंदन कर जगह दिया |
मुझमें छिपा अनमोल रतन,
क्यों तिरस्कार बेवजह किया ?

तल में ही ले लो स्थान |
तुझसे भी है जग कल्याण ||

सांध्यदीप सुनते क्रंदन,
करे बंधहीन बंदीजन को |
अंधकार में भटके हैं जो,
कर उज्ज्वल उनके तम को ||
***

/79/

जहॉ ज्वलित हो सांध्यदीप,
है वो पूजा की थाली |
बगिया खून पसीना सींचे,
है वो ऐसा माली ||

कर्मवीर ही कीर्तिवान हो,
सुवासित रहता जग में |
संघर्षशील युवा अक्सर,
सुमेरु बदल देता रज में ||

अब कर्मयुद्ध संधान करो |
स्वयं सिद्ध कृति ज्ञान वरो ||

सांध्यदीप द्रुत ज्ञान बढ़ाने,
सीख बताता कण कण को |
अंधकार में भटके हैं जो,
कर उज्ज्वल उनके तम को ||
***

/80/

जीने की तरकीब सीख लो,
पढ़कर वेद पुराण से |
लेकर देखो वाणी बाइबिल,
गीता और कुरान से ||

जीवन में संगीत भरो,
सब धर्मों के सम्मान से |
सर्व धर्म समभाव जोड़े,
इंसानों को इंसान से ||

दृढ़ निश्चय जब पलता मन |
तप ढलता फौलादी तन ||

सांध्यदीप नवजीवन देता,
शोषित व्यथित पतित जन को |
अंधकार में भटके हैं जो,
कर उज्जवल उनके तम को ||
***

/81/

धैर्य समाहित जिसके अंतस,
उसकी सफलता क्या कहना ?
साहस शौर्य पराक्रम गाथा,
गढ़ते काल गति बढ़ना ||

लिखे स्वयं इतिहास वीर,
गैरों के लिये लड़ाई कर |
थके कदम पीछे न हटे,
मंजिल की अहम चढ़ाई पर ||

जो दृढ़वत हो चले उसूल |
दुर्जन चुभे विष बुझे त्रिशूल ||

सद्विचार से सांध्यदीप,
करे निर्विकार विकृत जन को |
अंधकार में भटके हैं जो,
कर उज्जवल उनके तम को ||
***

/82/

ऐ नवयुवकों उठो सम्हालो,
तुम अपने खुद का आवेग |
आगे बढ़ नित गढ़ सकते हो,
हाथों से किस्मत की रेख ||

मन का सारा तम हर लेता,
दिव्यजनों का नम संकेत |
वरन करो जीवन में उतारो,
सांध्यदीप का सुधि संदेश ||

दूर करो झट जीवन क्लेश |
सुख से गुजरे जीवन शेष ||

सांध्यदीप है ज्ञानदीप ,
जो सुनते कारुण क्रंदन को |
अंधकार में भटके हैं जो,
कर उज्ज्वल उनके तम को ||
“”””””””””

-डॉ. अशोक आकाश

शेष भाग अगले अंक में

2 responses to “काव्‍य श्रृंखला : सांध्‍य दीप भाग-18-डॉ. अशोक आकाश”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अगर आपको ”सुरता:साहित्य की धरोहर” का काम पसंद आ रहा है तो हमें सपोर्ट करें,
आपका सहयोग हमारी रचनात्मकता को नया आयाम देगा।

☕ Support via BMC 📲 UPI से सपोर्ट

AMURT CRAFT

AmurtCraft, we celebrate the beauty of diverse art forms. Explore our exquisite range of embroidery and cloth art, where traditional techniques meet contemporary designs. Discover the intricate details of our engraving art and the precision of our laser cutting art, each showcasing a blend of skill and imagination.