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सोशल मीडिया का हिंदी भाषा पर प्रभाव-चोवा राम वर्मा ‘बादल’

सोशल मीडिया का हिंदी भाषा पर प्रभाव-चोवा राम वर्मा ‘बादल’
सोशल-मीडिया-का-हिंदी-भाषा-पर-प्रभाव
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सोशल-मीडिया-

वर्तमान युग में सोशल-मीडिया से भला कौन परिचित नहीं होगा? ज्ञान और सूचनाओं के आदान-प्रदान में यह मीडिया सबसे आगे है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इसके सामने बौने दिखाई दे रहे हैं। सोशल-मीडिया इंटरनेट के माध्यम से वर्चुअल वर्ल्ड का निर्माण करता है जिससे वैश्विक दूरियां समाप्त हो रही हैं ।जीवन का ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जिस पर सोशल-मीडिया का प्रभाव न पड़ा हो। कुछ सकारात्मक है तो कुछ नकारात्मक भी है। इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन शैली से लेकर भाषा में भी पड़ा है। हमारी राजभाषा हिंदी भी सोशल-मीडिया के प्रभाव से अछूती नहीं है। इस प्रभाव को हम दो रूपों में देख सकते हैं ।

सोशल-मीडिया-का-हिंदी-भाषा-पर-सकारात्मक प्रभाव-

सोशल-मीडिया पाठशाला की तरह काम कर रहा है। यह सब के लिए उपलब्ध है और ज्ञानार्जन का सशक्त माध्यम है। यह सूचनाओं को अपने प्लेटफार्म फेसबुक ,व्हाट्सएप ,इंस्टाग्राम एवं ट्वीटर आदि के माध्यम से द्रूत गति से प्रसारित व प्रचारित करता है।

सोशल मीडिया ने हिंदी को वैश्विक मंच प्रदान किया-

सोशल-मीडिया में पहले अंग्रेजी भाषा का ही बोलबाला था किंतु अब कुछ अलग हटकर दिखने की लालसा व भारत में सबसे बड़ी संपर्क भाषा होने के कारण हिंदी का कब्जा है ।सोशल मीडिया ने हिंदी को वैश्विक मंच प्रदान किया है। आज विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे नंम्बर पर आने वाली हिंदी उच्च पादान पर जाने के लिए पूर्णतया तैयार है। विश्व के सभी देशों के निवासी इसे सीख रहे हैं। बड़े बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ाई हो रही है।

हिंदी भाषा में विमर्श शक्ति में वृद्धि हुई है-

सोशल मीडिया के कारण हिंदी का बहुत ही ज्यादा प्रचार-प्रसार हुआ है। सोशल मीडिया में प्रस्तुत हिंदी के संदेशों को समझने के लिए लोग हिंदी भाषा सीख रहे हैं। हिंदी भाषा में व्यक्त विचारों को समझने में ज्यादा असुविधा नहीं होती । यह एक वैज्ञानिक भाषा है, साथ ही साथ अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यही कारण है कि यह आम लोगों को ज्यादा आकर्षित करती है । सोशल मीडिया इस क्रम में सहायक साबित हुआ है इसके प्रभाव के कारण लोगों की हिंदी भाषा में विमर्श शक्ति में वृद्धि हुई है। लोगों के शब्द भंडार में आशातीत वृद्धि हुई है ।

पुस्तकों की सहज उपलब्धता-

सोशल मीडिया के कारण आज प्राचीन हो या अर्वाचीन सभी प्रकार की पुस्तकें पाठक को सहजता से उपलब्ध है। जिसे शायद वह खरीद कर नहीं पढ़ पाता ।

        कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि हिंदी भाषा के उत्थान में सोशल मीडिया के महत्वपूर्ण सकारात्मक भूमिका है।

नकारात्मक प्रभाव-

सिक्के के दो पहलू होते ही हैं। सकारात्मकता के साथ सोशल मीडिया का हिंदी भाषा पर नकारात्मक प्रभाव भी कुछ कम नहीं पड़ रहा है जोकि अत्यंत चिंतनीय है ।

विश्वनियता का संदिग्ध होना-

सोशल मीडिया में प्रस्तुत सामग्री पर किसी का व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता है ।इस कारण इन सामग्रियों के विश्वनियता संदिग्ध होती है ।सूचनाओं को तोड़ मरोड़ कर पेश कर दिया जाता है ।मूल स्रोत का पता ही नहीं चलता। बहुत सी जानकारियां भ्रामक होती है। यह सब हिंदी भाषा के उत्थान में बाधक है।

भाषा का विकृत होना-

सोशल मीडिया  हिंदी भाषा को खिचड़ी बना रहा  है ।लोगों ने अपनी नई भाषा गढ़ ली है जिसके कारण शब्दों के सौंदर्य में गिरावट हुई है । उसकी मर्यादा भंग हुई है। उसका स्वरूप विकृत हो रहा है। जिसके कारण देव भाषा संस्कृत से उत्पन्न हिंदी अटपटी लगती है।

भाषा संस्कार में कमी आना-

सोशल मीडिया में इस तरह से खिचड़ी भाषा के रूप में हिंदी को प्रस्तुत किया जा रहा है कि उससे ज्ञान निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही है ।गहन चिंतन का अभाव परिलक्षित हो रहा है ।सोशल मीडिया में इस तरह सामग्रियों के कारण हिंदी भाषा जो संस्कार की जननी है कमजोर दिखाई दे रही है।

निष्कर्ष-

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि यदि कुछ नकारात्मक प्रभाव को छोड़ दें तो सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा के उत्थान में व उसके प्रचार-प्रसार में, उसे विश्वव्यापी बनाने में बहुत ही सकारात्मक प्रभाव डाला है।

-चोवाराम वर्मा 'बादल'

इसे भी देखें-समकालीन कविताओं में व्यवस्था के विरूद्ध अनुगुंज

साहित्यिक चर्चा

3 responses to “सोशल मीडिया का हिंदी भाषा पर प्रभाव-चोवा राम वर्मा ‘बादल’”

  1. सत्यधर बान्धे Avatar
    सत्यधर बान्धे
    1. मयारू मोहन कुमार निषाद Avatar
      मयारू मोहन कुमार निषाद
  2. आशा आजाद Avatar
    आशा आजाद

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