
केवल घटनाओं का बयान नहीं बल्कि समाज का आलोचनात्मक विमर्श कहानी संग्रह – थाने के नगाड़े
समीक्षक:- डुमन लाल ध्रुव
समीक्षा-
हिन्दी साहित्य में कहानी विधा ने सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन जीवन की विसंगतियों को उभारने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। देश के सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव इसी परंपरा के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी प्रकाशित कृति “ थाने के नगाड़े ” (भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली) में शामिल कहानियां जो भारतीय समाज की जटिलताओं, विडम्बनाओं और बदलते परिवेश की गहरी पड़ताल करती है।
संग्रह की कहानियां विषय, शिल्प और संवेदना की दृष्टि से विविध और सशक्त हैं।
दहशत और हॉट-हॉट डांस –
यह कहानी आधुनिक उपभोक्तावादी संस्कृति और मनोरंजन उद्योग की चमक-दमक के भीतर छिपी हुई असुरक्षाओं और भय की अभिव्यक्ति है। ‘हॉट-हॉट डांस’ का प्रतीक वैश्विक पूंजी और बाजारवाद के प्रभाव को उजागर करता है। प्लम्बर रिजवान का सपना- साधारण श्रमिक का सपना, उसकी मेहनत और टूटते हुए अरमान इस कहानी की मुख्य धुरी है। प्रवासी मजदूरों के जीवन, उनकी पहचान और संघर्ष को इसमें मार्मिकता के साथ चित्रित किया गया है। राजधानी से गुमी किताब- यह कहानी बौद्धिक और सांस्कृतिक सरोकारों की गिरावट की ओर संकेत करती है। राजधानी के सत्ता-केन्द्रित समाज में किताब का गुम होना ज्ञान, विवेक और संवेदना के खोने का प्रतीक है। ध्वजारोहण – राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति का स्वर यहां व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रकट होता है। औपचारिकता में बदलते राष्ट्रगौरव और खोखले प्रतीकों की पोल खोलती हुई यह कहानी ‘राष्ट्रीय चेतना’ के वास्तविक अर्थ पर प्रश्न खड़े करती है। साहब-बीवी और बाबाजी – आधुनिक जीवन में धर्म, राजनीति और परिवार के अंतर्संबंधों का व्यंग्यपूर्ण चित्रण। बाबाजी के माध्यम से बताया गया है कि कैसे अंधविश्वास और सत्ता की मिलीभगत आमजन के जीवन को प्रभावित करती है। मिशन पीआरटी – शिक्षा व्यवस्था और उसके बाजारीकरण पर कटाक्ष। मिशन के नाम पर शिक्षा किस तरह व्यापार में बदल रही है । यह कहानी उसी की सच्चाई उजागर करती है।
सन्धि, विग्रह और मित्रलाभ कथा – यह कहानी पंचतंत्र शैली की व्यंग्यात्मक झलक लिए हुए है। सामाजिक और राजनीतिक गठजोड़ों, तोड़-फोड़ और लाभ की मानसिकता को इसमें प्रतीकात्मक ढंग से रखा गया है। थाने के नगाड़े – संग्रह की शीर्षक कहानी है।पुलिस-प्रशासन और सत्ता तंत्र की विसंगतियों को उजागर करती है। ‘ नगाड़े ’ शक्ति प्रदर्शन और भय उत्पन्न करने का प्रतीक है। यह कहानी आमजन पर राज्यसत्ता के दबाव और उसकी विडम्बनाओं की गहन पड़ताल करती है। अन्धी मछलियां और प्लेजर कैप्सूल – भोगवादी संस्कृति, अंधी दौड़ और खोखले सुख की तलाश का कड़वा यथार्थ। यहां ‘ अंधी मछलियां ’ उपभोक्ता समाज के बेमतलब भागते इंसान का प्रतीक है।
कहानी लेखक डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की भाषा और शैली – सरल, व्यंग्यात्मक और संवाद प्रधान है। भाषा में जीवन्त बिंब और प्रतीकों का सशक्त प्रयोग मिलता है। मजदूर जीवन, सत्ता, शिक्षा, धर्म, उपभोक्तावाद और राष्ट्रप्रेम – सबका गहन चित्रण है।
थाने के नगाड़े संग्रह की लगभग सभी कहानियां सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। नगाड़े, अंधी मछलियां, गुमी किताब जैसे प्रतीक कहानियों को गहराई प्रदान करते हैं।
डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव का यह संग्रह समकालीन हिन्दी कहानी को नया आयाम प्रदान करता है। उनकी कहानियां केवल घटनाओं का बयान नहीं, बल्कि समाज का आलोचनात्मक विमर्श है।
इनमें आमजन की पीड़ा, हाशिए पर पड़े लोगों की बेचैनी और सत्ता की विसंगतियां स्पष्ट दिखाई देती हैं। संग्रह की कहानियां पाठक को सोचने पर मजबूर करती है और सामाजिक चेतना जगाती है। व्यंग्य और यथार्थ का ऐसा संयोजन हिन्दी कहानी में बहुत कम देखने को मिलता है।
“ थाने के नगाड़े ” केवल कहानियों का संग्रह नहीं बल्कि यह भारतीय समाज का आईना है। इसमें सत्ता, धर्म, शिक्षा, श्रम और उपभोक्तावादी संस्कृति के बीच फंसे आमजन की वास्तविक तस्वीर उभरकर सामने आती है। डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की यह कृति हिन्दी कथा-साहित्य में अपने तेवर, यथार्थ और व्यंग्यात्मकता के लिए दीर्घकाल तक स्मरणीय रहेगी।
– डुमन लाल ध्रुव
मुजगहन,धमतरी (छ.ग.)
पिन – 493773





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