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बाल कविता संकलन(2022): तितली उड़ती रही -प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन(2022): तितली उड़ती रही -प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन(2022): तितली उड़ती रही

-प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह

बाल कविता संकलन(2022): तितली उड़ती रही
बाल कविता संकलन(2022): तितली उड़ती रही

1.तितली उड़ती रही देर तक

तितली उड़ती रही देर तक ,
बैठ गया कीड़ा कुछ क्षण में
बोला अच्छा तुम ही जीती
आओ फिर वापस आओ।
आज सुबह ही दोनों उठकर
जोर जोर चिल्लाये
बोलो चलो देखते हैं
कितना कौन दूर उड़ पाये।
तितली बोली नेली कीड़े
चलो छोड़ते रेस शर्त अब
देखो सुन्दर फूल खिले हैं
करते उनसे मिलकर बातें।

2.तितली को चींटी ने देखा

तितली को चींटी ने देखा
बोली बहन मुझे भी उड़ना
चलो बिठाओ मुझे पंख पर
हमको करना सैर सपाटे।

समझो तुम अपनी शक्ति ,
चींटी बहन जानती हो ,
जहाँ आप जा सकती हैं
वहां नहीं हम उड़ सकते।

छोटे छोटे कोनों तक ,
मिटटी में भी काफी भीतर
आप चली जाती हैं ,
सबकी शक्ति अलग अलग है ,
फिर क्यों उड़ने को कहती हो ?

3.नयी -नयी कोमल सी पत्ती

नयी -नयी कोमल सी पत्ती,
किरणों को पुकार कर बोली ,
बहनों आओ मिलकर खेलें
बातें थोड़ी अधिक ठिठोली।

किरणें मुस्काई यह सुन कर ,
बहन अभी आती हूँ रूककर ,
देखो अभी सवेरा होगा ,
हम चलते हैं समय देखकर।

4.एक नन्हा चींटा

एक नन्हा चींटा
लिये है गिटार ,
पत्तियों को लपेट
बना लिया तार।

बजा रहा गीत
गीत में भरी है प्रीत
प्रकृति की बहार ,
प्रकृति से प्यार।
नन्हा चींटा गए रहा
लिये है गिटार।

5.मचल रहीं डालियाँ

पात नए लिये लिये
मचल रहीं डालियाँ
प्रसन्न चित बसंत अब
हर तरफ बही ख़ुशी
वृक्ष हुये हरे भरे
झूम रहीं डालियाँ।
है बसंत की हवा
सुगंध है हर तरफ।
चहक रहे विहग सभी
झूमती पवन बही,
ख़ुशी हर तरफ दिखी ,
झूम रही डालियाँ।

6;तीन नन्हे फूल

तीन नन्हे फूल
झूम झूम गायें गीत
गीत में तितलियाँ
गीत में मिठास।

तीन नन्हे फूल
गा रहे हैं गीत ।
हवा नाच रही मगन ,
कर रहीं अठखेलियां ।
नन्हे तीन फूल ,
गा रहे हैं गीत ,
खिलखिला कर हँसे ,
वहां कुछ गिलहरियां,
तीन नन्हे फूल ।
फिर उधर उठा धुआँ ,
फूल सभी रो पड़े
हवा देख रही मौन ,
आप मत डरो, सुनो।
मैं अभी वहां पहुंच
दूर उड़ा दूँ धुआँ
सुनो प्रिय फूल तुम
मैं कुछ कह रही ।
हवा उठी , उड़ा दिया
दूर कहीं ले गयी
जो धुआँ अभी उठा
फूल खुश हुये सभी।

7.चिड़िया गाने लगी गीत

बहने लगी हवा महकी सी
चिड़िया गाने लगी गीत।
छँटा अँधेरा रात हटी
चहल पहल हर तरफ बढ़ी।
तितली ने आवाज़ लगायी ,
निकलो बाहर कीड़े भाई ,
आज सुबह ही हम निकलेंगे ,
सैर दूर तक कर आयेंगे।
कीड़ा बोला आता हूँ ,
सैर सपाटे करता हूँ।

8.नटखट चींटी

नटखट चींटी छुप जाती है
जहाँ जगह पाती है ,
कभी खिलौनों के ऊपर
कभी किताबों के भीतर।
अंदर से ही गीत सुनाती
कहती मुझको ढूंढ के देखो।
बुन्नू कहती बाहर आओ ,
चींटी अब तुम मत दौड़ाओ।
बहार आ जाती है चींटी
खिलखिलाकर दोनों हंसती।

9.चींटी की आयी है दोस्त

चींटी की आयी है दोस्त ,
दूर कहीं से , किसी शहर से।
थकी हुयी हैं सभी चींटियां
यात्रा थोड़ी लम्बी थी।
लेकिन मिलकर दोस्तों से
बातें कितनी खुश हो करतीं।
बता रहीं हैं कितनी गर्मी
पेड़ नहीं थे रस्ते में।

10.नन्हा कीड़ा

नन्हा कीड़ा विद्यालय के
गेट पर जाकर चिपका,
उसे देखना था बच्चों को
बच्चों को कुछ कहना।
बड़ी भीड़ थी आज यहाँ पर,
शायद कोई उत्सव था ।
बच्चों को जल्दी थी ,
अंदर बाहर आने जाने की।
इतने में चोटिल हो बैठा ,
नन्ह कीड़ा किसी बैग से ।
उसे बर्ड आर्या ने देखा ,
उसने फिर यह सोचा ,
यहाँ गेट पर नन्हा कीड़ा
यूँ तो दब जायेगा !
उसने ढूँढा कहीं से पत्ता
पत्ते पर कीड़े को रक्खा ,
और उठाकर बड़े पार्क में
उसको जा बैठाया ।
कीड़ा खुश था ,आर्य खुश थी ,
कीड़ा धन्यवाद दे मुस्काया।

11.जंगल में स्कूल खुला

फूल हँस रहे
पवन गा रही ,
चिडिय चहकीं
खुशियां आयीं।
जंगल में स्कूल खुला
नेवले बंदर सही
सैकड़ों जानवर पढ़ने आये।
सब गाते जंगल का गीत ,
पढ़ते पर्यावरण की सीख।

12.लोमी और बेनी

लोमी बन्दर सोच मग्न था
उधर झीलके पास सुबह
गंभीर ध्यान में वह बैठा था
बेनी चिड़िया आयी।
और कान के पास अचानक
गीत कोई वह गायी।
लोमी चौंका , “यह क्या है” !
चिड़िया हंसने लगी जोर से
लोमी को गुस्सा आया ,
बहुत तेज वह चिल्लाया।
चिड़िया हँसती रही मगर ,
बोली , “इतना भी क्या लोमी भाई” !

13.एक नन्ही तितली

गाती है गीत ,
स्वर उसके धीमे
फूलों से प्रीत।
खेलतीं पंखुड़ियां उसके साथ ,
फूलों की दोस्त वह ,
फूल उसके साथ।

14.रोशी- राही निकल पड़े

रोशी राही निकल पड़े
सुबह सुबह यात्रा पर।
कहते हैं उनको चलना है ,
बहुत दूर तक वह भी जल्दी।
दोनों चींटों ने वैसे तो
यात्रायें की हैं बड़ी बड़ी
किन्तु आज गर्मी है भीषण
गर्मीं बाधाएं बढ़ा रही।
फिर भी दोनों ही हैं कर्मठ
दोनों हैं काफी चंचल ,
बात चीत करते करते
दोनों पथ पर निकल चले।

15.शाल्वी गिलहरी

बोली आज गिलहरी आकर,
बच्चों , क्या मालूम है तुमको,
हमने कितने वृक्ष उगाये ?
कितने बीज कहाँ से लाये ?

अगर पढोगे तो देखोगे ,
कितने जंगल यूँ बन जाते हैं –
अपना भोजन ढूंढ ढूंढ कर
जो हम लेकर आते हैं ,
कभी भूलवश खा न पाये
बीज वहीँ उग जाते हैं।

16.रूमी गिलहरी

चट -चट करती रोज़ गिलहरी
खिड़की पर है रोज़ बैठती
कितने कितने धागे लाकर
उनको वहां बैठ सुलझाती।
बना रही है कहीं घोंसला
कोई ठिकाना , घर प्यारा सा।
उन्ही घोंसलों में आयेंगे ,
उसके प्यारे नन्हे बच्चे
उन्हें सिखायेगी वह चलना
शाखाओं पर उछल कूदना।
खिड़की पर है रोज़ बैठती
चपल गिलहरी प्यारी सी।

17.मैना का एक बड़ा सा दल

मैना का एक बड़ा सा दल
रोली मैना , पोली मैना
बोनी मैना, पेकू मैना
और कई उनकी साथी,
गाना गाते पहुंच गयीं
सुबह सवेरे बेबी पार्क।
बच्चे भी थे टहल रहे ,
एक दुसरे का पुछा हाल।
खुश थे सरे बच्चे भी
मैना का भी दाल खुश था।
सबने की बातें आपस में
गीत कहानी की भरमार।

18.तितली को भी कुछ कहना था

तितली को भी कुछ कहना था
भंवरे को भी कुछ कहना था ,
फूल मगर मुरझाया था
जैसे दिन में सोया था ।

भंवरे ने गुन- गुन की तेज
तितली भी मंडराई खूब
मुसकाया फिर फूल हंसा
बोला गर्मी कितनी तेज।

गर्मी से बेहाल हो रहे
हम यूं ही अलसाए थे
गर्मी में रहना है बचकर
इसीलिए सुस्ताये थे ।

19.दोपहर में जब लू थी तेज

दोपहर में जब लू थी तेज
कोयल कहीं छिपी जा बैठी
अलसाये लोगों को देखा
गाये फिर अपने गाने ।

कुछ पक्षी थे भूखे प्यासे
कुछ थे गर्मी से बेहाल।
सबने कोयल से जा बोला ,
है तो गाना बहुत सुरीला ,
पर पानी की करो तलाश।

20.मधुमक्खी का स्कूल

था बसंत था कितना सुंदर
खुशबू फैली थी हर ओर
नीम के नन्हे फूलों बीच
मधुमक्खी ने खोला स्कूल।
स्कूल नहीं , यह समर कैंप था ,
वह गीत गान सिखलाती थी,
कैसे भोजन करें इकट्ठा ,
वह करके दिखलाती थी।
नन्हे नन्हे कीड़े आये ,
आईं तितली और गिलहरी ,
हर तरफ वहां खुशियां फैली
खुशबू फैली हर ओर।

21.ओजू बंदर लोनी कछुआ

ओजू बंदर लोनी कछुआ
आकर दोनो पास मिले ,
एक निकल कर बीच नदी से
और दूसरा उतर पेड़ से ।
ओजू बंदर लोनी कछुआ
दोनो में हो गई दोस्ती ,
लोनी ने जल के फल लाये
और पेड़ से जामुन बंदर ।
दोनो खुश थे मिलकर उसदिन
अपनी अपनी बात बताई ,
और मजे से बहुत देर तक
अपनी अपनी कही कहानी।
मैनू मैना ने कुछ बातें सोची
प्रदूषण के ऊपर ,
उड़ी तेज से ,फिर जा पहुंची
लीडा लीडर के घर पर
लीडू थी मैना की लीडर
वह चिड़ियों से घिरी हुई बैठी ,
बोली मैनू कैसी हो ,
आई क्या कोई रिसर्च सोचकर ?
बिल्कुल लीडू ,मैंने प्रदूषण पर
एक बड़ा सा लेख लिखा है ,
सुनो ,उसे ही लेकर आई ,
करो कार्य इसके ऊपर।

22.गोगो और मीमी

गोगो कछुआ मीमी बिल्ली
दोनो में हो गई दोस्ती
मीमी आती नदी किनारे
ठंडे ठंडे वहां किनारे ,
बहुत देर तक लेटी रहती
हरी घास को बिस्तर करके ।
गोगो भी आ जाता चलता
पानी से तुरंत निकलकर।
दोनो मिलकर गाने गाते
पक्षी खुश होते उन्हे देखकर ।

23.मैजू और काका

मैजू, काका दोनो घोड़े
दोनो रहते प्रेरक वन में।
है दोनो को काम मिला
इधर उधर वे रहें दौड़ते।
अगर कहीं खतरा दिख जाये
जंगल क्लब में तुरंत पहुंच कर
सबको सावधान कर आएं ।
दिन भर दोनो करते काम ,
जंगल की रक्षा उनका काम।

24.लादी और हाडा

लादी हाडा हैं दो बच्चे
एक बड़े भालू के ।
दिन भर दोनो बहुत उछलते
पेड़ों पर ,डाली पर ।
कल उनको मिली एक गिलहरी
बरगद के प्राचीन वृक्ष पर ,
बोली बच्चों शोर मत करो,
संगीत साधना मुझको करना ,
इस वृक्ष के ऊपर मुझको दिनभर।
लादी बोला ,क्षमा कीजिये
क्या मैं भी कुछ सीखूं
आप मुझे भी शिक्षा दें कुछ ,
आया हूँ मैं यही सोचकर ।

25.मामो और खाखा

मामो बिल्ली खाखा चूहा
नये -नये हैं दोस्त बने
जानवर सभी आश्चर्यचकित हैं
कैसे दोनो दोस्त बने ।
चूहा तो बिल्ली से डरता
बिल्ली चूहे की है दुश्मन ।
लोगों के मन की बात जानकर
दोनो बोले , अरे भाईयो
यह है अपना प्रिय शांतिवन।
हम सब साथ- साथ हिल- मिल कर
इस वन में रहते हैं,
जो भी कहीं बुराई दिखती
उसको दूर भगाते हैं।

26.इबा और गौबा

इबा गौबा दोनो मेढक
उछल कूद कर पहुंच गए
पानी के बाहर।
थोड़ी देर रहे अच्छे
फिर होने लगी उन्हे अफनाहट।
बाहर गर्मी बहुत तेज थी
हवा बह रही आंधी जैसी
दोनो ने सोचा कैसे ,
किसी तरह हम जल में लौटें।
बंदर ने उनको देख लिया
उनके कष्टों को भांप लिया।
उन्हे उठाकर ले जाकर,
पानी में उसने डाला।
पहुंच जलाशय में दोनो ने
सुख की ठंडी सांस भरी ।
बंदर को आभार जताया,
बंदर उन्हे देख मुसकाया।

27.मेगा और लस्सी

मेगा बहुत तेज खरगोश
उसको लस्सी लगती अच्छी
खाका का है कूल कॉर्नर
जहां है लस्सी बनती , बिकती ।
मेगा ने कुछ सिक्के लेकर
लस्सी वहां खरीदा।
ज्यों ही उसने पीना चाहा ,
बूढ़ा चूहा आ धमक।
बोला मुझको भी पीना है ,
लस्सी मेगा भाई ,
आज मगर पॉकेट खाली है
नही हुई कुछ खास कमाई ।
मेगा बोला इसमें क्या
हम दोनो शेयर करेंगे ,
चूँकि सिक्के थोड़े थे ,
इसलिए यही एक मंगवाई ।

28.ओओ बंदर

ओओ बंदर कब से यूं ही ,
डाली पकड़े लेटा था ,
सोच रहा था उसे निकलना
पास किसी फलदार बाग में ।
तभी अचानक ओनी चिड़िया
उड़ती उड़ती आई,
बोली ओओ बंदर भाई
कितनी नींद तुम्हे आती !
ओओ बोला अरे नही
मैं सोच रहा हूं यूँ ही कुछ ,
जाओ ओनी काम करो कुछ,
क्यों तुम परेशान करने आई !
ओनी बोली ओओ भाई ,
हमको जाना है उड़कर
एक बड़े से बाग में ,
पेड़ वहां हैं लदे हुये
फल से हैं सब झुके हुए ।
ओओ बोला चलते हैं हम भी
साथ साथ दोनो निकलेंगे ,
मिलकर फल दोनो खायेंगे
खुशियां बहुत मनाएंगे।

29.मिली और गिलमी

मिली गिलहरी मिलने आती
दोपहर में गिरगिट से ,
बोली कैसे हो गिलमी गिरगिट
नही दिखे तुम तीन दिनों से !
रोज पार्क में दोस्त तुम्हारे
सुबह- सुबह आ जाते हैं
आप नही आते हो तो ,
याद बहुत ही करते हैं।
गिलमी बोला धन्यवाद कहना दोस्तों को
मैं कुछ दिन के लिए गया था
इस उपवन के बाहर ।
सीखे हैं कुछ नए खेल,
मैंने बाहर जाकर।
कहना आकर सिखलाऊंगा ,
बड़ी खुशी है याद किया
बहन ,अभी कल आऊंगा ।

30.हाथी आये

चार हाथी आये,
जंगल के बाहर।
उन्हे देखने बच्चे निकले
अपने अपने घर के बाहर।
हाथी बोले प्यारे बच्चों
हम आये हैं तुम्हे बताने
गर्मी बहुत तेज है बाहर ,
पूरा पर्यावरण प्रदूषित है ।

प्यारे बच्चों मिलकर सोचो
धरती की कैसे रक्षा हो
प्रदूषण को दूर करें हम
कैसे सब कुछ हरा भरा हो।

31.गैंडे और हाथियों का मैच

गैंडे और हाथियों ने ,
जंगल में रखा है मैच।
दोनो की टीमों में आये ,
सज-धज कर उनके अपने लोग।

जो जीतेगा वो ट्रॉफी ले
विजयी कहलायेगा
और दूसरा खुश होकर
उनको गले लगाएगा ।

32.मोंपो सियार

मोंपो सियार खुश था
उसने एक खेत था ढूंढा ,
रोज वहां तरबूज खा आता ,
और किसी को पता न लगता ।

उसकी चोरी की आदत ,
यूं ही बढ़ती रही दिनों दिन।
और एक दिन रखवाले ने ,
उसको पकड़ा बस यूं ही ।

रखवाले ने उसको देखा और कहा ,
” मोम्पो तुम तरबूज मांग लेते
क्यों ऐसे ही आ जाते हो
बिना बताये कहते हो चोरी करके?

मोंपो बोला ,
क्षमा कीजिये गलती मेरी ,
हे दयालु रखवाले भाई ,
दोस्त समझ लो अब मुझको ,
हमको नहीं पता था सचमुच
तुम इतने अच्छे हो भाई ।

33.नन्हा बच्चा हाथी का

चला झूमता नन्हा बच्चा
चमकदार काला ,हाथी का।
उससे पार करना था दलदल
यह बड़ी दूर तक फैला था ।
तोते ने उसको देखा,
सोचा कैसे इसे बचायें
यह नन्हा है ,नही जानता
दलदल में बिल्कुल न जाये ।
तोता चहका ,उड़ते उड़ते
बच्चे पर आ बैठा।
बोला नन्हे प्यारे बच्चे
दलदल में बिल्कुल न जायें।
दलदल में जा कर फंस जायेंगे
निकल कभी न पायेंगे
बच्चे सीखो कैसे चलना
कहां निकालना ,कहां न जाना ।

34.गुनगुन चींटी

चींटी एक बहुत ही प्यारी ,
गुनगुन उसको कहते थे।
उसको कीड़े और मकोड़े,
सच्चा दोस्त बताते थे।

जैसा भी हो जो हो मौसम ,
गुनगुन सबके साथ चले।
कैसी भी मेहनत हो करनी ,
गुनगुन खुश हो कर हिले मिले।

35.नन्हा बादल

गर्मी के मौसम में कैसे
छोटा बादल हंसते आया ।
बच्चों ने ज्यों उसको देखा
मन उनका ललचाया ।

बोले छोटे बादल बच्चे
तुम भी बच्चे ,हम भी बच्चे
नही यहीं यहां से तुम जाओ
आओ अपना जल बरसाओ।

36.झोंका बोला पंखुड़ियों से

एक हवा का झोंका आकर
बोला पंखुड़ियों से
मुझे देखकर मत तुम डरना
हम तो आए तुम्हे देखकर ।

आओ हम मिलकर खेलें खेल
अपनी तुम सुगंध दो हमको
हम इसको दूर दूर फैलायें ।
पंखुड़ियां खुश होकर बोली
कितनी प्यारी बात कही
चलो क्यों नही हम मिलकर
इतना सुंदर खेलें खेल।

37.प्यारा नन्हा फूल बैंगनी

पौधे की चोटी पर
प्यारा नन्हा फूल बैंगनी ,
बच्चों ने देखा जब उसको
बोले क्या है नाम आपका
मेरे प्यारे दोस्त बैंगनी ।

खुश होकर वह बोला फूल
कितना प्यारा नाम दिया
मैं तो हूं बैंगन का फूल,
क्या इसीलिए तुम कहे बैंगनी !

38.नदी शांत हो कर बहती

नदी शांत हो कर बहती ,
पानी कम है गर्मी में।
पौधे भी झुलसे झुलसे हैं
पेड़ भी कितने झुके हुये ।

पक्षी भी हैं दुखी दुखी
इस भीषण गर्मी में
सोच रहे हैं कब हो वर्षा
खुशियां फैली नम होकर।

39.काला कौवा उड़ते उड़ते

काला कौवा उड़ते उड़ते
पहुंच गया स्कूल में ,
बच्चे सारे बैठे थे
कक्षाओं में स्कूल की ।
कौवे ने खिड़की के अंदर झांका ,
बच्चे ने उसको किया इशारा ,
कौवा मत डिस्टर्ब करो,
समय नहीं था खेल का।

जल्दी ही छुट्टी होगी
हम आयेंगे पार्क में
और बतायेंगे हम तुमको
क्या हुआ यहां स्कूल में ।

कौआ सुना और मुसकाया
फिर उड़कर बाहर आया ।

40.छोटा टिड्डा उड़ा दूर तक

छोटा टिड्डा उड़ा दूर तक ,
इधर उधर पौधों के ऊपर।
और बताया मत डरना।
हम यहां रहेंगे दोस्त ही बनकर ।

जो गिरी हुई हैं यहां पत्तियां
हम उनको ही खायेंगे
नन्हे पौधों ,दोस्त हमारे
हम खुशियां यहां मनाएंगे ।

41.बेलो चिड़िया आकर बोली

बेलो चिड़िया आकर बोली
खिड़की पर सुबह सुबह बैठी
बच्चे जागो सवेरा है
मत खुशियां भूलो
तुम सो सो कर ।
सुबह सुबह ठंडी पुरवाई
कितनी मन को भाती
कितनी सुंदर हवा चल रही
खुशबू कितनी सुंदर आती ।

42.हरी चिड़िया लाल पंख

हरी चिड़िया लाल पंख
गाती मीठे गीत ,
चोंच भी उसकी लाल लाल
कहती बन जाओ मेरे मीत ।
दूर दूर मैं उड़ने जाती ,
वन बागों की सैर कर आती।
तुम्हे सुनाऊंगी मैं प्रतिदिन
कितनी कथा ,कहानी गीत ।

43.हवा चली तब कूदा बन्दर

हवा चली डाली हिल हिल कर ,
ऊपर उछली नीचे आई।
बंदर ने ज्यों देखा इसको
उसने अपनी कला दिखाई ।
बोला यूं कूदें हम शांत हवा में
तब इसमें है क्या बात ,
तूफानों में झूले कूदे
तभी बनेगी कुछ बात ।
तूफानों से जब खेलेंगे
तभी बहादुर कहलाएंगे
तभी हमारे पराक्रम के
किस्से लोग सुनाएंगे ।

44.झाड़ी में कुछ दाने

देखा झाड़ी में कुछ दाने
एक गिलहरी ने फैले
सोचा कैसे यहां गिरे हैं
दाने ये चमकीले ।
कहीं छिपा तो नही बहेलिया
यहीं कहीं बैठा हो ,
चिड़ियों के खातिर उसने
अपना जाल बिछाया हो।
तभी उसे दिख गया शिकारी
छिपा खड़ा था ,
फिर क्या था वह चिल्लाई
चिड़िया सावधान हो बैठी
युक्ति बहेलिए की काम न आई।

45.हरे मेरे पंख

हरी हरी पत्तियां ,
हरे मेरे पंख।
मैं उड़ आता नीले नभ में ,
मैं कर जाता पार हिमालय,
करता कितनी नदियां पार।
प्रकृति मेरी माता
पवन मेरा दोस्त
मैं विहग हरा भरा ,
तोता मेरा नाम।

46.बिल्ली चूहे और गेंद

दबे पांव चल रही बिल्ली सफेद
तभी उसे आ लगी एक हरी गेंद ,
हंस पड़े चूहे खिलखिला कर सभी
चीख कर कहा ,”ठीक हुआ गेंद लगी !”
बिल्ली उठी चल पड़ी, मुस्करा मुस्करा
कह रही- चूहों मैं तो खेल रही खेल।
गेंद मेरे दोस्त ने फेंक दिया है इधर ,
आओ तुम सभी करो मुझसे मेल।

47.शाम और बदल

लाल बादलों के बीच चमक रहा सूर्य
दूर खड़ी देख रही खुशी खुशी शाम ।
गीत गा रही हवा बादलों के बीच
पेड़ झूम झूम रहे सुन मधुर संगीत।
खुशी खुशी लौट रहे थके सब किसान
पशु पक्षी भी चले अपने स्थान ।

48.गिरगिटों के पार्क में

गिरगिटों के पार्क में कुछ नये सदस्य ,
दो नयी गिलहरी , टिड्डे दो चार।
सभी को सीखना है आज प्रकृति राग
कोयलें सिखा रही मधुर गीत गान ।
गिरगिटों ने रंग बदल किए कुछ प्रयोग
चिक चिका गिलहरियां राग रहीं जोड़।
गीत में गूंज रहा हरा भरा पार्क ,
खुश सभी हैं यहां खुशी के प्रयोग।

49.जेजे और गीलू

जेजे कौवा गीत गा रहा ,
संगीत दे रही गीलू कोयल।
पत्तो के बाजे बजते है ,
हवा चल रही सर -सर -सर ।

है बसंत की सुबह आज ,
खुशबू फैली यहां हर तरफ ,
पक्षी सब करते हैं कलरव।
है बसंत की सुबह आज ,
खुशबू फैली यहां हर तरफ।

50.बाहर कितना प्रदूषण है

आज गा रही धीमे स्वर में
जाने क्यों बेचारी बुलबुल ,
इसे देख कुछ लगा अलग सा
जाकर बच्चे ने पूछ लिया ।
बुलबुल बोली क्या बोलूं मैं
मेरे प्यारे नन्हे बच्चे
बाहर कितना प्रदूषण है ,
धुँआ – धूल कितना फैला है ।
गाते ही मेरा स्वर बच्चे
प्रदूषण से रूंध जाता है,
इसीलिए यह गीत हमारा
तुमको धीमा लगता है ।

प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह के विषय में
प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं। वे अंग्रेजी और हिंदी लेखन में समान रूप से सक्रिय हैं । फ़्ली मार्केट एंड अदर प्लेज़ (2014), इकोलॉग(2014) , व्हेन ब्रांचो फ्लाईज़ (2014), शेक्सपियर की सात रातें (2015) , अंतर्द्वंद (2016), चौदह फरवरी (2019),चैन कहाँ अब नैन हमारे (2018)उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। बंजारन द म्यूज(2008) , क्लाउड मून एंड अ लिटल गर्ल (2017),पथिक और प्रवाह (2016) , नीली आँखों वाली लड़की (2017), एडवेंचर्स ऑव फनी एंड बना (2018),द वर्ल्ड ऑव मावी(2020), टू वायलेट फ्लावर्स(2020) प्रोजेक्ट पेनल्टीमेट (2021) उनके काव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने विभिन्न मीडिया माध्यमों के लिये सैकड़ों नाटक , कवितायेँ , समीक्षा एवं लेख लिखे हैं। लगभग दो दर्जन संकलनों में भी उनकी कवितायेँ प्रकाशित हुयी हैं। उनके लेखन एवं शिक्षण हेतु उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट , शिक्षक श्री सम्मान ,मोहन राकेश पुरस्कार, भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार, डॉ राम कुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान 2020 ,एस एम सिन्हा स्मृति अवार्ड जैसे सत्रह पुरस्कार प्राप्त हैं ।

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