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विश्‍व योग दिवस पर विशेष : योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है

विश्‍व योग दिवस पर विशेष : योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है

विश्‍व योगदिवस पर विशेष :

योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है

-डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत

विश्‍व योग दिवस पर विशेष : योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है
विश्‍व योग दिवस पर विशेष : योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है

योग भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है-

हमारे जीवन में योग का बहुत महत्व है । जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होना है तो फिट रहना बहुत जरूरी है । योग शब्द युज से उत्तपन्न हुआ है जिसका अर्थ है एकजुट करना या एकीकृत करना, जुड़ना यानी दो तत्वों का मिलन योग कहलाता है । योग 5000 वर्ष से भारतीय ज्ञान पीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है । योग में ध्यान, प्राणायाम और आसन के माध्यम से हम मन श्वास औऱ शरीर के विभिन्न अंगों में सामंजस्य बनाना सीखते हैं ।

विश्‍व योग दिवस-

योग से कोई भी अनजान नहीं है । बच्चे, बूढ़े व जवान सभी इसे करते है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग अति आवश्यक है ।
आज के भाग दौड़ भरी जिंदगी में योग करना बहुत ही लाभदायक है । योग तो जीवन का आधार है । 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में सभी देशों में मनाया जाता है । योग एक अनूठी साधना है जो मनुष्य को सक्रिय बनायें रखती है । योग करने से व्यक्ति दीर्घायु, स्वस्थ व निरोगी रहता है ।

योग का शास्‍त्रीय आधार-

हमारे शास्त्रों में कई तरह के योग की बात कई गई है । जैसे – राज योग, कर्म योग ,भक्ति योग आदि वैसे योग का अर्थ आत्मा का परमात्मा से मिलन है । हम आज जिस योग की बात करते हैं वह शास्‍त्रीय अष्टांग योग पर आधारित है जो (1) यम, (2) नियम, (3) आसन, (4) प्राणायाम, (5) प्रत्याहार, (6) धारणा, (7)ध्यान, (8) समाधि । शास्‍त्रों में योग के संबंध में कहा गया है- ‘योगः चित्त – वृत्ति निरोगः” अर्थात योग न केवल हमारे मांसपेशियों को पुष्ट करता है, शरीर को तंदुरुस्त बनाता है अपितु मन और चित्‍त को भी स्‍वस्‍थ रखता है ।

योगाभ्‍यास के लिए आश्‍यक है-

योगाभ्यास के लिए सुबह का समय उत्तम माना गया है । योग खाली पेट किया जाता है । अब अगर हमें नियमित योग करना है तो सबसे पहले हमें रात को ठीक समय पर सही भोजन करना चाहिए और सही समय पर सोना भी चाहिए । यदि हम सही समय पर उठते हैं तो प्रातःकाल ही शौच आदि से निवृत होकर स्नान करते हैं । उसके बाद ऐसे स्थान पर योगाभ्यास करते हैं जहाँ स्वच्छ वायु हो । योगाभ्यास से पूर्व हम कुछ व्यायाम अवश्य करते हैं जिसमे सूर्य नमस्कार आवश्यक है । उसके बाद ही हम कुछ आसन व प्राणायाम का अभ्यास करते हैं ।

प्रणायाम-

प्राणायाम में प्रमुख हैं भ्रस्तिका ,कपाल भारती, त्रिबंध, अग्निसार, अनुलोम-विलोम ,भ्रामरी, ॐ का उच्चारण .प्राणायाम में मुख्य रूप से साँसों की गति को नियंत्रित व संचालित किया जाता है । आसान एक प्रकार से व्यायाम ही हैं । जिनमे तरह-तरह की शारीरिक मुद्राएं बनायीं जाती हैं ।

योग का महत्‍व और लाभ-

योग द्वारा मन व मस्तिष्क में शांति का प्रादुर्भाव पैदा होता है।  हमारी रोग प्रतिशोधक क्षमता बढ़ जाती है । हम तनाव, उच्च रक्त-चाप, शुगर, टेंशन आदि बिमारियों से दूर रहते हैं. योग द्वारा हम अपने ह्रदय, किडनी, फेफड़े ,लीवर आदि अंगो को निरोग रख सकते हैं । यही नहीं योग से शरीर में होने वाले कई रोगों के साथ कई तरह के शारीरिक दर्द से भी छुटकारा मिलता है । योगाभ्यास से शरीर के हर अंग तक रक्त का संचार होता है । खून के साथ शुद्ध वायु पहुँचती है । हमारी बुद्धि का भी तीव्र विकास होता है । पूर्ण रूप से आयु के अनुसार हमारी लम्बाई,  वजन भी बढ़ता है । हम खेल – कूद में उच्च शिखर को छूने लगते  है ।

*योग करो, निरोग रहो*

-डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत’*✍️
मुम्बई

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