
राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों का संदेश देती काव्य कृति – ये मेरा हिन्दुस्तान है
समीक्षक- डुमन लाल ध्रुव
हास्य-व्यंग्य कविता हिन्दी साहित्य की एक ऐसी धारा है, जो न केवल पाठक को हंसाती है बल्कि सामाजिक यथार्थ का गहरा व्यंग्य भी करती है। छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि श्री पुष्कर सिंह राज इसी परंपरा के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी प्रकाशित कृति “ ये मेरा हिन्दुस्तान है ” (प्रेरणा साहित्य समिति, बालोद) भारतीय समाज, राजनीति, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का बहुआयामी दर्पण है। यह कृति हास्य-व्यंग्य की धार के साथ-साथ प्रेरणा, राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों का संदेश भी देती है।
इस संग्रह में संकलित कविताएं बत्तीस शीर्षकों में विभक्त है। जिसमें ये मेरा हिन्दुस्तान है, हिन्दुस्तान आबाद करे, भारत मां की आन में, जलता वतन देखिये इन रचनाओं में कवि का राष्ट्रप्रेम प्रखर रूप से दिखाई देता है। वह अपने वतन की एकता, अखंडता और समृद्धि की कामना करता है।
सब कुछ नहीं रूपैय्या, ये कैसी नादानी है, यहां कौन सुन पाता है, राजनीति के दोहे, राज के दोहे इन कविताओं में कवि पुष्कर सिंह राज समाज में व्याप्त लोभ, भ्रष्टाचार, अवसरवाद और राजनीति की चालबाजियों पर कटाक्ष करता है। अच्छा हुआ बापू, सत्याग्रह का दमन, नेकी का वक्त आयेगा जैसी इन कविताओं में महात्मा गांधी की विचारधारा की झलक है। कवि यह बताना चाहता है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग से ही समाज और राष्ट्र का उत्थान संभव है।
सदाचार का मरहम, सच्चाई को देख, सफलता के मंत्र, जीते जी तो स्वर्ग भोग
ये कविताएं मनुष्य को नैतिक आचरण, सत्यनिष्ठा और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देती हैं।
मइया जी की जय होवे, तुम मेरे गांव आते, दिल मेरा दहल गया, एक तू ही भगवान रहे कवि पुष्कर सिंह राज इन कविताओं में करुणा, अपनापन और जीवन के मानवीय पक्ष का चित्रण प्रस्तुत किया है। हास्य-व्यंग्य के माध्यम से कवि का व्यंग्य केवल हंसी तक सीमित नहीं बल्कि विचारोत्तेजक है। राजनीति के दोहे और सब कुछ नहीं रूपैय्या इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
कवि की भाषा आमजन के करीब है। इसमें छत्तीसगढ़ी जीवन की सहजता और हिन्दी का प्रवाह दोनों मौजूद हैं। कविताएं गेयता लिए हुए हैं जिन्हें मंचीय पाठ में विशेष प्रभाव से प्रस्तुत किया जा सकता है। अंधियारे को चीर, जलता वतन, मझ धारों से नाता जैसे बिंब कवि की संवेदनाओं को गहराई देते हैं। हास्य और व्यंग्य के साथ-साथ कवि के यहां सुधारात्मक चेतना भी विद्यमान है।
पुष्कर सिंह राज की कृति का शीर्षक “ ये मेरा हिन्दुस्तान है ” कवि के राष्ट्रीय गौरव और आत्मगौरव का उद्घोष है। यह संग्रह केवल व्यंग्य नहीं, बल्कि आदर्शों की पुनःस्थापना का प्रयास है। कवि की पंक्तियों में व्यंग्य के साथ करुणा और सुधार की आकांक्षा निहित है। हास्य की आड़ में वह गंभीर संदेश देता है। यह कृति छत्तीसगढ़ी साहित्य को हास्य-व्यंग्य की एक सशक्त धारा से जोड़ती है। इसमें सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों का चित्रण है।राष्ट्रप्रेम और मानवीयता का उद्घोष है। हास्य-व्यंग्य और आदर्शवाद का संतुलित मिश्रण है। कविताएं पाठक को हंसाते हुए भी सोचने पर मजबूर करती हैं। यही सच्चे व्यंग्य की पहचान है।
“ ये मेरा हिन्दुस्तान है ” हास्य-व्यंग्य कविताओं का ऐसा संग्रह है जो पाठक को राष्ट्रप्रेम, नैतिकता और सामाजिक सुधार की ओर प्रेरित करता है। श्री पुष्कर सिंह राज की यह कृति न केवल छत्तीसगढ़ी साहित्य में बल्कि हिन्दी हास्य-व्यंग्य परंपरा में भी एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।
– डुमन लाल ध्रुव
मुजगहन, धमतरी (छ.ग.)
पिन -493773





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